25 दिसंबर से 5 जनवरी तक बंद रहेंगे उत्तरी राज्यों के स्कूल, ठंड के कारण विस्तारित छुट्टियाँ

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25 दिसंबर से 5 जनवरी तक बंद रहेंगे उत्तरी राज्यों के स्कूल, ठंड के कारण विस्तारित छुट्टियाँ

द्वितीयक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा 3 दिसंबर, 2025 को जारी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल 25 दिसंबर, 2025 से 5 जनवरी, 2026 तक बंद रहेंगे। यह फैसला केवल एक छुट्टी नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए एक ज़रूरी कदम है — जहाँ ठंड की लहर इतनी तीव्र हो रही है कि तापमान कई जिलों में 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरने का अनुमान है। यह दूसरा लगातार वर्ष है जब शीतकालीन छुट्टियाँ 31 दिसंबर के बजाय 5 जनवरी तक बढ़ाई गई हैं।

ठंड की वजह से छुट्टियाँ बढ़ीं, बच्चों की सेहत पर गंभीर असर

दोहर के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी पप्पू सिंह के अनुसार, "शिक्षा विभाग कड़के की सर्दी से बच्चों को बचाने के लिए अवकाश दिया जाता है। जिससे किसी भी बच्चे और शिक्षकों को कोई परेशानी न हो।" यही वजह है कि इस बार छुट्टियाँ पाँच दिन बढ़ा दी गईं। पिछले साल भी ठंड के कारण कई जिलों में अतिरिक्त छुट्टियाँ दी गई थीं, जिससे बच्चों को सर्दी, सांस लेने में तकलीफ और बुखार से बचाया जा सका। मौसम विभाग ने राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और उत्तरी उत्तर प्रदेश में 'ला नीना' के प्रभाव के कारण इस साल और भी तीव्र ठंड की भविष्यवाणी की है।

इस बार की छुट्टियाँ 12 दिन की हैं — जो पिछले साल के 7 दिन के विपरीत है। बिहार में इस बार केवल सात दिन की छुट्टियाँ हैं, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में शीतकालीन छुट्टियाँ अभी भी 31 दिसंबर तक ही रहेंगी। लेकिन उत्तरी भारत के लिए यह एक जीवन-रक्षक निर्णय है। बच्चों के लिए ठंड बस एक असुविधा नहीं, बल्कि एक जीवन-खतरा हो सकती है। कई बार बच्चे बर्फ़ीले रास्तों पर चलते समय बीमार पड़ जाते हैं, या घरों में गर्मी की कमी से श्वास संबंधी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं।

स्कूलों का शेड्यूल: छुट्टियों के बाद बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू

6 जनवरी, 2026 को स्कूल फिर से खुलेंगे। इस दिन से ही शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देंगे — खासकर कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए। यह वक्त बहुत महत्वपूर्ण है। अगर छुट्टियाँ छोटी होतीं, तो बच्चे ठंड से बीमार होकर पढ़ाई में पीछे रह जाते। अब इन 12 दिनों में वे आराम करेंगे, घर पर पढ़ेंगे, और शारीरिक रूप से तैयार होंगे। कुछ शिक्षकों का कहना है कि इस बार छुट्टियों के दौरान ऑनलाइन रिवीजन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि पढ़ाई न रुके।

अतिरिक्त रूप से, शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर 5 जनवरी के बाद भी ठंड बरकरार रही, तो छुट्टियाँ आगे बढ़ाई जा सकती हैं। यह एक लचीला निर्णय है — जिसमें बच्चों की सेहत को पहले रखा गया है। गाँवों में तो कई परिवारों के पास गर्मी के लिए गैस या बिजली का साधन नहीं है। बच्चे ठंड में सोते हैं, ठंड में खाना खाते हैं, और ठंड में स्कूल जाते हैं। इस बार उन्हें एक बार फिर बर्फ़ीले रास्ते से आराम मिलेगा।

क्या हो रहा है अन्य राज्यों में?

इस निर्णय का असर सिर्फ उत्तरी राज्यों तक ही सीमित नहीं है। नोएडा और गाजियाबाद में पिछले साल स्कूल 31 दिसंबर को बंद हुए और 15 जनवरी तक खुले नहीं। कुछ जिलों में तो 18 जनवरी तक छुट्टियाँ रहीं। उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में शिक्षा अधिकारी ने पहले से ही 4 दिसंबर से छुट्टियाँ शुरू कर दी हैं। राजस्थान में तो छुट्टियाँ 24 दिसंबर से शुरू हो रही हैं। यह सब दर्शाता है कि अब शीतकालीन छुट्टियाँ एक राष्ट्रीय मानक नहीं, बल्कि एक स्थानीय जरूरत है।

दूसरी ओर, दक्षिणी राज्यों में शीतकालीन छुट्टियाँ अभी भी छोटी हैं — क्योंकि वहाँ ठंड का असर नहीं पड़ता। लेकिन उत्तर में यह एक जीवन-मृत्यु का मुद्दा बन चुका है। एक गाँव के शिक्षक ने कहा, "हमारे बच्चे बर्फ़ीली सुबहों में दो किलोमीटर चलकर आते हैं। उनके हाथ-पैर सफेद हो जाते हैं। अगर हम इन्हें घर भेज दें, तो वो बीमार नहीं होंगे।"

अगले छुट्टियों का शेड्यूल: अगले कुछ महीनों की योजना

अगले छुट्टियों का शेड्यूल: अगले कुछ महीनों की योजना

इस शीतकालीन छुट्टी के बाद, शिक्षा विभाग ने अगले कुछ महीनों का भी कैलेंडर जारी किया है:

  • 14 जनवरी: मकर संक्रांति
  • 23 जनवरी: बसंत पंचमी
  • 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस
  • 1 फरवरी: संत रविदास जयंती
  • 4 फरवरी: सब ए बरात
  • 15 फरवरी: महाशिवरात्रि
  • 3 अप्रैल: होली छुट्टी
  • 14 अप्रैल: अम्बेडकर जयंती
  • 23 अप्रैल: वीर कुंवर सिंह जयंती
  • 25 अप्रैल: जानकी नवमी
  • 1 मई: मेय डे
  • 28 मई: ईद उल जुहा
  • 5 अक्टूबर: शिक्षक दिवस
  • 11 अक्टूबर: दुर्गा पूजा कलश स्थापन
  • 17-21 अक्टूबर: दुर्गा पूजा छुट्टी
  • 7-17 नवंबर: दिवाली-छठ छुट्टी

इनमें से अधिकांश छुट्टियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की हैं, लेकिन शीतकालीन छुट्टियाँ एकमात्र ऐसी हैं जो सीधे जीवन-रक्षा से जुड़ी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बार छुट्टियाँ पिछले साल की तुलना में क्यों बढ़ाई गईं?

पिछले साल भी ठंड के कारण छुट्टियाँ बढ़ाई गई थीं, लेकिन इस बार मौसम विभाग ने 'ला नीना' के प्रभाव के कारण अधिक तीव्र ठंड की भविष्यवाणी की है। कई जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने की संभावना है, जो बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए छुट्टियाँ पाँच दिन बढ़ाकर 12 दिन कर दी गईं।

क्या छुट्टियाँ आगे बढ़ाई जा सकती हैं?

हाँ। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर 5 जनवरी के बाद भी तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है या बर्फ़ीली बर्फ़ की स्थिति बनी रहती है, तो छुट्टियाँ और बढ़ाई जा सकती हैं। यह निर्णय स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के आधार पर लिया जाएगा, जो जिले की वास्तविक स्थिति को देखकर फैसला करेंगे।

बिहार और दक्षिणी राज्यों में छुट्टियाँ क्यों छोटी हैं?

बिहार में शीतकालीन छुट्टियाँ केवल सात दिन की हैं क्योंकि वहाँ तापमान कम गिरता है। दक्षिणी राज्यों में तो ठंड का कोई असर नहीं होता — यहाँ गर्मी की छुट्टियाँ लंबी होती हैं। इसलिए छुट्टियों की लंबाई स्थानीय मौसम के अनुसार तय की जाती है, न कि एक राष्ट्रीय मानक के अनुसार।

बच्चों के लिए ठंड क्यों खतरनाक है?

बच्चों का शरीर बुजुर्गों की तुलना में ठंड को नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है। ठंड से श्वास संबंधी बीमारियाँ, निमोनिया और बुखार बढ़ जाते हैं। गाँवों में गर्मी के साधनों की कमी के कारण बच्चे रात में ठंड से बीमार हो जाते हैं। कई बार यही वजह होती है कि स्कूल छोड़ देने का फैसला लिया जाता है।

शिक्षकों को क्या असर होगा?

शिक्षकों के लिए भी यह एक आराम का समय है। वे इस दौरान बोर्ड परीक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेंगे, अपनी कक्षाओं का आकलन करेंगे और कुछ जिलों में ऑनलाइन रिवीजन सत्र भी चलाएंगे। लेकिन उनके लिए भी ठंड एक चुनौती है — कई शिक्षक अपने घरों में गर्मी के लिए बिजली या गैस का साधन नहीं रखते।

क्या ऑनलाइन क्लासेस चलेंगी?

कुछ जिलों में शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन रिवीजन सत्र और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की योजना बनाई है, खासकर कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए। लेकिन गाँवों में इंटरनेट की कमी के कारण यह सब बहुत सीमित है। अधिकांश बच्चे घर पर पुस्तकें पढ़ेंगे और शिक्षकों के दिए गए नोट्स का उपयोग करेंगे।

Chandni Mishra

Chandni Mishra

मैं एक भारतीय समाचार लेखिका हूँ। मुझे भारतीय दैनिक समाचार पर लेख लिखने का शौक है। मैं अपने घर पर रहकर काम करती हूँ और अपने परिवार के साथ समय बिताना पसंद करती हूँ। शीर्ष समाचार और घटनाओं पर लिखते हुए मैं समाज को सूचित रखने में विश्वास रखती हूँ।

10 Comments

Boobalan Govindaraj

Boobalan Govindaraj

9 दिसंबर, 2025 . 01:19 पूर्वाह्न

ये फैसला बहुत अच्छा है भाई साहब, बच्चों की सेहत सबसे ऊपर होनी चाहिए। ठंड में स्कूल जाना असल में एक रिस्क है, खासकर गांवों में। अब तो घर पर गरमा-गरम चाय पीकर पढ़ाई करेंगे, बेहतर होगा।

mohit saxena

mohit saxena

10 दिसंबर, 2025 . 02:05 पूर्वाह्न

मैंने पिछले साल भी यही बात कही थी। जब तक हम उत्तरी राज्यों की ठंड को नहीं समझेंगे, बच्चे बीमार ही रहेंगे। ऑनलाइन क्लासेस का जिक्र है तो अच्छा है, लेकिन इंटरनेट नहीं है तो क्या करेंगे? बेसिक नोट्स और किताबें ही काम आएंगी।

Sandeep YADUVANSHI

Sandeep YADUVANSHI

11 दिसंबर, 2025 . 20:32 अपराह्न

अरे ये सब बकवास है। दक्षिण भारत में तो 30 डिग्री में भी स्कूल खुले रहते हैं। हम इतने कमजोर हो गए कि 5 डिग्री में बच्चों को घर भेजना पड़ रहा है? ये नरम दिल वाली सोच देश को कमजोर बना रही है।

nithin shetty

nithin shetty

12 दिसंबर, 2025 . 22:18 अपराह्न

क्या असल में ये फैसला सिर्फ ठंड के लिए है? या फिर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए ज्यादा टाइम देने का एक तरीका है? मैंने सुना है कि कुछ जिलों में तो पहले से ही छुट्टियां शुरू हो गई हैं। ये सब एक बड़ा अड्डा है क्या?

Aman kumar singh

Aman kumar singh

13 दिसंबर, 2025 . 11:14 पूर्वाह्न

भाई, ये बात सिर्फ उत्तरी भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। जहाँ तापमान खतरनाक हो, वहाँ बच्चों को बाहर नहीं भेजना चाहिए। हम जो भी बोलते हैं, बच्चे असल में जिंदगी जी रहे हैं। इस छुट्टी का मतलब है जीवन बचाना, न कि छुट्टी लेना।

UMESH joshi

UMESH joshi

15 दिसंबर, 2025 . 07:58 पूर्वाह्न

इस तरह के निर्णयों में हमें यह सोचना चाहिए कि शिक्षा का असली मकसद क्या है। क्या यह सिर्फ पढ़ाई का नियमित अनुसरण है, या बच्चे के शरीर और मन की सुरक्षा? ठंड में बच्चों को बाहर भेजना, उनकी जिंदगी के साथ खेलने जैसा है। ये फैसला बहुत मानवीय है।

pradeep raj

pradeep raj

15 दिसंबर, 2025 . 08:57 पूर्वाह्न

मैं इस निर्णय के व्यापक सामाजिक-आर्थिक-पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण करना चाहूंगा। यह एक विशिष्ट निर्णय है जो शिक्षा अधिकारियों द्वारा लिया गया है, जिसमें जलवायु परिवर्तन के निरंतर प्रभाव, शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा के असमान वितरण के बीच एक संतुलन स्थापित किया गया है। गांवों में ऊर्जा अभाव, आवासीय सुविधाओं की कमी, और शिक्षकों की व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, यह एक समझदारी भरा उपाय है।

Vishala Vemulapadu

Vishala Vemulapadu

16 दिसंबर, 2025 . 22:52 अपराह्न

अरे ये तो बहुत बुरा है। अगर बच्चों को घर भेज दिया जाएगा तो वो क्या करेंगे? फोन पर घूमेंगे। बच्चों को नियमित रूप से स्कूल जाना चाहिए, नहीं तो उनकी आदतें खराब हो जाएंगी। ये ठंड का बहाना है, असल में शिक्षा का स्तर गिर रहा है।

M Ganesan

M Ganesan

18 दिसंबर, 2025 . 22:05 अपराह्न

ये सब एक षड्यंत्र है। ला नीना? ठंड? बच्चों की सेहत? सब बकवास। असल में ये राजनीतिक दबाव है। किसी ने बताया कि इस बार बोर्ड परीक्षाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। बच्चों को बीमार करके उन्हें असफल बनाने की योजना है। ये सब गवर्नमेंट का खेल है।

ankur Rawat

ankur Rawat

19 दिसंबर, 2025 . 22:31 अपराह्न

मैं तो बस ये कहना चाहता हूँ कि जब बच्चे बर्फ में चलते हैं तो उनके हाथ ठंडे हो जाते हैं, उनकी उंगलियाँ नीली हो जाती हैं। अगर हम उन्हें घर भेज दें, तो वो गर्मी में बैठकर किताबें पढ़ सकते हैं। ये छुट्टी बस एक छुट्टी नहीं, ये एक नया जीवन है। धन्यवाद शिक्षा विभाग।

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