बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में चल रहे भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन ने दर्शकों को रोमांचक क्षणों से भरा। जब भारत ने 231 पर 3 विकेट के स्कोर के साथ अपनी पारी फिर से शुरू की, तब वह न्यूजीलैंड से 125 रनों से पीछे था। इस स्थिति में सारफराज खान, जो रात भर 70 रन पर नाबाद थे, और उनकी जोड़ीदार ऋषभ पंत ने भारतीय पारी को संभालने की जिम्मेदारी ली। सरफराज का यह चरण एक प्रतिष्ठित उपलब्धि के रूप में सामने आया जब उन्होंने अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया।
ऋषभ पंत के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण अवधि रहा, क्योंकि दूसरे दिन उनके घुटने में चोट आई थी, लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ता को साबित करते हुए सरफराज के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की। उनकी इस साझेदारी ने पचासा पार किया, और यह एक लंबी भूमिका निभाने की तरफ बढ़ रही थी। हालांकि एक बिन्दु पर दोनों बल्लेबाजों के बीच एक बड़ा भ्रम हुआ जिसने इन्हें लगभग रन आउट करवा दिया था, परंतु उनका अनूठा समन्वय उन्हें बचा ले गया।
चौथा दिन भारत के लिए केवल आत्मविश्वास का विषय नहीं था बल्कि एक नई रणनीति का मंच था। न्यूज़ीलैंड ने नई गेंद लेकर अपनी आक्रामकता दिखाई। टिम साउदी और मैट हेनरी जैसे गेंदबाजों ने नई पिच की परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने की कोशिश की। लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने ठेहराव दिखाया और इसी के साथ वे धीरे-धीरे बढ़ते चले गए।
मैच के तीसरे दिन, जिसने उच्च स्कोरिंग के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की, ने भारतीय प्रयासों में नई ऊर्जा भर दी। उस दिन कुल मिलाकर 453 रन बने थे जो भारत में एक दिन के खेल का दूसरा सबसे ऊंचा स्कोर था। न्यूजीलैंड की टीम ने अपनी पहली पारी में 402 रन बनाए थे जिसका सामना करते हुए भारत की टीम ने शुरुआत में 46 रन मात्र बनाकर बड़ा अंतर छोड़ दिया था। अब भारत को एक मजबूत गति पकड़नी थी ताकि वह इस महत्वपूर्ण स्थिति से बाहर आ सके।
चौथे दिन के खेल ने भारत को न केवल अपनी पिछली कमी को जोड़ने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें एक नई मानसिकता के साथ खेलने का भी मौका मिला। मैच के इस चरण में भारतीय बल्लेबाजों को न्यूजीलैंड के गेंदबाजों द्वारा डाली गई परेशानियों का सामना करना पड़ा, और तब यह भारतीय टीम के लिए निर्णायक साबित होने की जरूरत थी।
सारफराज खान द्वारा अपने पहले टेस्ट शतक की उपलब्धि ने उनके क्रिकेट करियर में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी। उन्होंने अपनी सूझबूझ और स्थिरता के माध्यम से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया, और इसी के लिए वे लंबे समय तक याद किए जाएंगे। दूसरी तरफ, ऋषभ पंत ने भी अपनी चोट के बावजूद मैदान में साहस और संयम का परिचय दिया, जो उनके टीम में स्थान और योगदान को और प्रासंगिक बनाता है।
इस प्रकार चार दिन के खेल के अंत ने भारत को एक नई स्थिति में दाखिल कर दिया जहां वह न्यूजीलैंड के खिलाफ एक नई आशा के साथ खेल को लेकर चल सकता है। सारफराज और पंत की रणनिति और धैर्य ने इस दिन को भारतीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में प्रस्तुत किया।