भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में भारत-चीन के बीच संबंधों में संवाद को प्राथमिकता देने की बात की। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से मतभेदों को विवादों में बदलने से रोका जा सकता है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत और चीन के बीच पिछले हज़ारों साल पुरानी सांस्कृतिक संबंधों को भी याद किया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिंपिंग के साथ कज़ान, रूस में हुई मुलाकात के बाद सीमाओं पर सामान्य स्थिति बहाल हो रही है।
चीन की प्रतिक्रिया में, उनके विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने पीएम मोदी के विचारों को सकारात्मक बताया। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए एक 'सहयोगी ड्रैगन-हाथी नृत्य' के रूप में देखने की बात कही, जो दोनों देशों के लिए सफलता की कुंजी हो सकता है। माओ निंग ने कहा कि ये महत्वपूर्ण है कि भारत और चीन 2000 सालों से चले आ रहे ऐतिहासिक आदान-प्रदान, आपसी सीखने, और वैश्विक शांति व विकास के लक्ष्यों को साथ में ध्यान में रखें।
सीमा विवाद के बारे में बात करते हुए, मोदी ने कहा कि 2020 की झड़प के बाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार हुआ है। भारत सीमा पर शांति और आपसी सहयोग के प्रति प्रतिबद्ध है। चीन ने बताया कि वह कज़ान सम्मेलन में हुई सहमतियों को लागू करने और द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, विशेषकर जब दोनों देश अपनी 75वीं राजनयिक वर्षगांठ मना रहे हैं।
भारत-चीन संबंध आने वाले समय में किस दिशा में जाएंगे यह देखने का विषय है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत और सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के इच्छुक दिखाई देते हैं।